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How To Be Happy / Khush Kaise Rahe

 How To Be Happy / Khush Kaise Rahe

How to be happy


खुश कैसे रहें ? एक बहतरीन शानदार प्रश्न है इसका उत्तर समझने से पहले आपको यह समझना होगा कि हम दुखी कैसे होते हैं और उसके साथ साथ हम समझेंगे कि जिस प्रकार हम दुखी होते हैं उस ही प्रकार से हम खुश भी हो सकते हैं क्योंकि दोनों में कोई खास अंतर नहीं है ! जी हाँ बिलकुल सही पढ़ा कोई भी अंतर नहीं है ! तो आइये समझते हैं यह कैसे काम करता है

पूर्व अनुमान

हर व्यक्ति अपने भविष्य के लिए या आने वाले अगले क्षण के लिए कुछ न कुछ पूर्व अनुमान लगा लेता है जिसको अंग्रेज़ी में एक्स्पक्ट EXPECT करना कहते हैं वह ऐसा अनुमान लगा लेता है कि ऐसा होगा तो ऐसा हो जायेगा लेकिन अगर अनुमान सही नहीं बैठता तो वह दुखी हो जाता है

expectations hurt




हल: 

यदि आपके साथ भी ऐसी कोई परेशानी है तो आप इसे दो प्रकार से हल कर सकते हैं 

एक आप अनुमान (EXPECT) करना छोड़ दीजिये आप कुछ भी expect मत कीजिये लेकिन आप शायद ऐसा हर बार न कर पाएंगे तो आप दूसरा तरीका अपनाएं UNEXPECTATION को भी EXPECT करें आप अनुमान बदल लीजिये मतलब आप जो अनुमान लगायें उसमें ऐसा अनुमान लगायें कि यदि वह हो जाता है तो भी आप खुश रहें और नहीं होता है तो आप को तो आपको पहले ही पता था, क्योंकि आप ने पहले से अनुमान लगा रखा था

असंतोष

जब जीवन में असंतोष होता है मतलब जीवन में  संतोष/इतमीनान (SATISFACTION) नहीं होता तब व्यक्ति दुखी होता है और खुश नहीं रह पाता इसका मुख्य कारण होता है जीवन में जो है उसकी तरफ ध्यान न करके उसकी तमन्ना  करते हैं जो आपके पास नहीं है

हल: 

इसका हल है कृतज्ञता (Thankfulness) यदि आप इसका पालन करेंगे, तो आप को निम्नलिखित लाभ होने की तो गारंटी है ही

  • Positivity बढ़ेगी
  • Energy लेवल बदलेगा
  • Self esteem में सुधर होगा
  • नींद अच्छी आएगी
  • आपकी खुशियाँ बढ़ेंगी
  • आपका Stress लेवल कम होगा
  • Physical health में सुधार आएगा
  • मानसिक बीमारियों में लाभ मिलेगा

how to be happy alone


और इसके अलावा भी बहुत कमाल देखने को मिलेंगे ऐसा मेरा वादा और दावा दोनों हैं, क्योंकि यह एक प्राक्रतिक नियम है, इसको आज मनोविज्ञान के जगत में Gratitude Journal कहते हैं इसका पालन करने के लिए आपको बस रोज़ के कुछ minutes देने हैंआपको एक DIARY लेनी है, उस पर आज की DATE डालनी है, इसके बाद सबसे ऊपर लिखना है, 

THANK YOU GOD FOR या हे ईश्वर! मैं तेरा शुक्र गुज़ार / कृतज्ञ हूँ

उसके नीचे आपको दैनिक जीवन की उन 5 चीज़ों को लिखना है जिनके लिए आप  ईश्वर को धन्यवाद देना चाहेंगे, ऐसा आपको रोज़ करना है, मात्र एक महीने में आप इसका कमाल देखेंगे, आपका जीवन बिलकुल बदल जायेगा, प्रारम्भ में यह थोड़ा कठिन लगता है लेकिन यह बहुत कमाल का, बहुत शानदार तरीका है, कुछ लोग पूछते हैं यह कब तक करना है? जवाब है जब तक आप ईश्वर से खुशियाँ लेना चाहते हैं, जब तक आप ईश्वर को कृतज्ञता (THANKFULNESS) प्रकट कीजिये

तुलना

how to be happy always


जब व्यक्ति स्वयं को दूसरों से तुलना करके यह सोचता है कि उसके पास क्या नहीं है या वह कैसे सामने वाले व्यक्ति से कम है तो वह Inferiority Complex ज़ोन में चला जाता है और स्वयं को कम आकने लगता है और सेल्फ इमेज यानि कि आत्मछवि को खराब कर लेता है

हल:

तुलना करना दिमाग की एक प्रकिर्या है लेकिन तुलना करके आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं यह बहुत महत्वपूर्ण है, जब आप तुलना करें तो आपको विचार करना है कि कैसे आप भी अपना विकास कर सकते हैं और क्या क्या बदलाव आपको लाने चाहियें, आपको सोचना है कि कैसे यह तुलना आपको दुखी नहीं करे, और आपको यह बिलकुल नहीं सोचना है कि मुझमें यह कमी है और में बेकार हूँ या मेरा नसीब खराब है बल्कि आपको सोचना है कि मुझमें यह कमी है और दुसरे व्यक्ति के पास वह वस्तु या गुण है तो मैं कैसे उसे प्राप्त कर सकता हूँ? यह प्रश्न आपको स्वयं से पूछना है, कोई तो रास्ता होगा ऐसा सोचें और वह वस्तु या गुण प्राप्त करने का मार्ग ढूँढें और दूसरा तरीका है अपने से नीचे देखना आपको अपने से नीचे वाले व्यक्ति की ओर देखना चाहिए कि उसके पास जो नहीं है वह आपके पास तो है ऐसा करके आप तुलना का सही प्रयोग करेंगे और दुख के बजाये संतुष्टि महसूस करेंगे

शरीर में तनाव

आजकल हर काम बैठे बैठे मशीनों का प्रयोग करते हुए हो रहा है और बढ़ता भी जा रहा है इसके चलते हम अपने शरीर का बहुत कम प्रयोग कर रहे हैं और धीरे धीरे प्रयोग कम होता चला जा रहा है, लेकिन इसके पीछे एक चीज़ बहुत प्रभावित हो रही है वह है आपके अंगों में तनाव का बैठता जाना, आपने देखा होगा कि एक माँ अपने नन्हे बच्चे को सीने से लगाकर उसके शरीर पर टैपिंग करती है तब वह बच्चा आराम में चला जाता है, रोना बंद कर देता है और सो जाता है क्योंकि शरीर में यानि कि अंगों में तनाव बैठ जाता है

how to be happy all the time


हल:

तनाव या दुखी रहना एक मानसिक मनोदशा है लेकिन शरीर का मस्तिष्क से सीधा सम्बन्ध है यह दोनों परस्पर जुड़े हुए हैं इसलिए जिम आदि जाना चाहिए या व्यायाम करना चाहिए, एक घंटा शरीर को खूब चलाना चाहिए और भगाई लगाना बहुत अच्छा विकल्प होता है, जब आप शरीर की फिजियोलॉजी बदलते हैं तो आपकी साइकोलॉजी बदलती है 

एक जैसी मनोदशा

आप एक आम खायेंगे आपको मज़ा आएगा, दूसरा खायेंगे आपको पहले वाले आम जैसा मज़ा आएगा या कुछ कम आएगा, तीसरा आम खायेंगे आपको अब कम मज़ा आएगा, जैसे जैसे आप आम खाते जायेंगे आपका दिल भरता जायेगा, एक समय में आप पूर्ण संतुष्टि बिंदु पर पहुंच जायेंगे 

how to be happy / khush kaise rahe


और फिर आपने आम खाना नहीं छोड़े तो आप को आम खाने  में मज़ा आना समाप्त हो जायेगा फिर आप थक जायेंगे आपको जबरदस्ती और आम खिलाएं जाएँ तो आप गुस्सा कर सकते हैं या दुखी हो सकते हैं

हल: 

जीवन में दुःख के साथ सुख और सुख के साथ दुःख का होना बहुत जरूरी है सिर्फ दुःख ही दुःख रहेगा तो भी , और सुख ही सुख रहेगा तो भी जीवन का आनन्द आना बंद हो जायेगा, जैसे लगातार मीठा नहीं खाया जा सकता और लगातार खट्टा भी नहीं खाया जा सकता, कभी खुशी कभी गम होना जरूरी है, लेकिन आपकी मनोदशा दुःख में भी सुख वाली होनी चाहिए यानि कि दुःख में भी आपको अपना आत्म विश्वास नहीं खोना है

भूत भविष्य का भूत

कुछ लोग अपने गुज़रे हुए समय की बातें सोचते रहते हैं, और बीते हुए कल का रोना रोते रहते हैं और कुछ लोग अपने भविष्य की चिंता करते करते अपनी चिता तक पहुंच जाते हैं, ऐसे लोगों पर एक भूत होता है इसको मैं भूत भविष्य का भूत कहता हूँ

how to be happy


हल:

इस भूत को भगाने का बहुत सरल तरीका यह है कि आप जो हैं वह हैं यह वाक्य बहुत सरल है लेकिन आप कहेंगे मैं जो हूँ वही तो हूँ! इसमें क्या सोचना और क्या करना है? जी सही कहा आप जो हैं वह ही हैं! लेकिन आप अपनी जीवन के हालात नहीं हैं, आप स्थिति नहीं हैं, आप परिस्थिति नहीं हैं, आप आपका व्यवहार नहीं हैं, आप अपना व्यापार नहीं हैं, आप संसार नहीं हैं, आप कोई भौतिक वस्तु नहीं हैं, आप अपने इमोशंस नहीं हैं, आप अपनी आत्मा भी नहीं हैं,  फिर आप कौन हैं? आप अपनी चेतना के पीछे छुपे हुए कुछ हैं, वह कुछ क्या है आइये समझते हैं एक क्षण के लिए शांत हो जाइये अपनी आंख बंद कर लीजिये और अपना ध्यान सब तरफ से हटा लीजिये, आप जहाँ हैं वहां का मौसम, आपके शरीर का तापमान, आपके दिमाग की प्रत्येक मनोदशा, मतलब की हर चीज़ से अपना ध्यान हटा लीजिये, शांत बैठिये और महसूस कीजिये अपने आप को, स्वयं को, गहरा सांस लीजिये अब आप वह हैं जो आप हैं, आपने स्वयं को महसूस किया होगा, आप वर्तमान मैं आ जाते हैं और शांति का अनुभव करते हैं

मुझे आशा है कि आपने इस पोस्ट HOW TO BE HAPPY को खूब ध्यान से पढ़ा होगा और आप इसको पुन: पढिये और स्मरण करके इसका प्रयोग कीजिये  

आज में जियो, आज का दिन कैसे सुख शांति के साथ गुज़ार सकते हो इसपर ध्यान करना चाहिए, ऐसा सोचना चाहिए कि यदि यह मेरे जीवन का अंतिम दिन होता तो में इस दिन को कैसे एन्जॉय (ENJOY) करता 

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